आभूषण महाराष्ट्र के
देशी विदेशी सभी महिलाओं को गहनों से विशेष लगाव होता है।भारत में हर प्रदेश की महिलाओं के कुछ विशिष्ट आभूषण होते है।उत्तर भारत में मांगटीका का प्रचलन है तो दक्षिण भारत में बालों की चोटी या जूडे में सजाये जाने वाले फूल लोकप्रिय है।
महाराष्ट्रियन महिलाओं के मंगलसूत्र और नथ तो अब सभी भारतीय महिलाओं में प्रसिद्धी पा चुका है और बहुत लोकप्रिय भी है। मगर कुछ महाराष्ट्रियन आभूषणों के बारे में अन्य भारतीयों को जानकारी नही होगी जैसे कि
1 कोल्हापुरी साज : कोल्हापुर जो कि अंबाबाई मंदिर और चप्पल के लिए प्रसिद्ध है उसी कोल्हापुर के नाम का गले में पहना जाने वाला यह आभूषण 'कोल्हापुरी साज' जिसे महाराष्ट्र में मंगलसूत्र के बराबर महत्व है। परंपरागत रूप से इसमें इक्कीस पत्ते होते है जिन्हे मराठी में पानाडी कहते है। बीच वाला पत्ता थोडा बडा लॉकेट जैसा जिसे साजघाट कहते है। उसपर किर्तिमुख बना हुआ होता है जो रक्षण करता है। साजघाट के मध्य स्थान पर लाल नग लगा होता है। अन्य बीस पत्तों पर तुलसी, कमल, ऐरावत, वाघनख, कामधेनु, तोता, शंख, चक्र, मोरपंख, मत्स्य, चंद्र, सूर्य, नागदेवता, बेलपत्र आदि शुभ चिन्ह बने होते है। इन इक्कीस पानाडियों को काले या लाल धागे में पिरोया जाता है। आजकल सोने या चांदी के तार में गठाई होती है।
2 बुगडी : बुगडी कान के उपर वाले हिस्से (helix) में छेदन कर के पहनी जाती है। एक स्क्रू की सहायता से इसे कान के cartilage पर फिक्स किया जाता है। आजकल बिना छेदन किए हुए पहनने लायक बुगडी भी मिलती है। सौंदर्य बढाने के साथ हि acupressure की वजह से शारीरिक उर्जा के संतुलन के लिए भी बुगडी पहनना फायदेमंद है।
3 पुतलीहार : गले में पहना जानेवाला यह आभूषण सोने या चांदी के छोटे छोटे सिक्कोंसे या पुतलियोंसे बना होता है। ये सिक्के गोल, अंडाकार या दिल के आकार के होते है। इन पुतलियों को जोड़कर या रेशम के धागे या चेन में पिरोकर बहुत सुंदर हार बनाते है। इन पुतलियों पर अधिकतर देवी लक्ष्मी का चित्र बना होता है इसलिए इस हार को लक्ष्मीहार भी कहते है। यह समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
4 ठुशी और वज्रटिका : ठुशी एकदम गले से सटाकर पहना जाने वाला चोकर जैसा आभूषण है जो कॉलर बोन पर बहुत खुबसूरती से विराजमान होता है। ठुशी सोने के बारीक मणियों से बनी होती है। वज्रटिका ठुशी का हि एक प्रकार है जिसके पिछे गद्देदार पॅडिंग लगी होती ताकि पहने रखना सुविधाजनक हो। साथ हि यह कम सोने में बन सकती है और दिखती भारी है। वज्रटिका कोल्हापुर की देवी अंबाबाई के पारंपरिक आभूषणों में से एक है इसलिए उसे कोल्हापुर लक्ष्मी ठुशी भी कहते है।
5 मोहनमाळ : मोहनमाळ का अर्थ है मनमोहक हार। सोने के मोतियों से बना एक सुन्दर नाजुक हार जो थोडा लंबा होता है।यह मोहनमाला एक या एक से अधिक लडियों की हो सकती है।
और भी कई आभूषण है जैसे बालों में अर्धचंद्राकार अंबाडा, कानों में कुडी, गले में चपलाकंठी और पोहेहार, बाहोंपर वाकी, कलाईयों पर तोडे और अष्टपैलू पाटली, पैरों में तोरड्या, छोटे बच्चों के पैरों में तांबे का वाळा आदि। पैरों की पांचो उंगलियों में पहनने वाली टो रिंग्स के नाम भी अलग है। अंगुठे में अंगठा, दुसरी उंगली में जोड़वी, तीसरी में बिछवा, चौथी में मछली और छोटी उंगली में जोवी या मांगटं। पैरों के आभूषण चांदी के होते है क्यों कि पैरों में सोना पहनना अशुभ माना जाता है। और दुसरी बात चांदी शीतल होने के कारण पैरों द्वारा शरीर में आनेवाली उष्णता को अवरोध उत्पन्न करती है।
ऐसे ये तरह तरह के आभूषण महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को संजोए रखते है, पूर्वजों की कहानियों को आगे बढाते है और पीढियों के बीच एक जीवंत कडी बन जाते है।
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