काॅम्प्लिमेंटस्
कुछ वर्ष पहले एक all women group के साथ दुबई प्रवास किया था। सभी महिलायें विभिन्न आयु गट की थी। सब अपने अपने ग्रुप के साथ थी। कुछ अकेली भी थी। इनमें एक सदस्या ऐसी थी जो हर ग्रुप के साथ enjoy कर रही थी। हालांकि वह उम्र में सबसे बडी थी मगर सबसे छोटी सदस्या के साथ भी उनकी दोस्ती थी। इसका कारण शायद यह था कि उन्हे हर एक में कोई न कोई गुण नजर आता था। वे हर किसी को कुछ न कुछ compliment जरूर देती थी। किसी के ड्रेस पर तो किसी के बालों पर तो किसी के स्माईल पर। मुझ से भी उन्होंने कहा, "अरे, कितना फास्ट चलते हो आप। कितनी एनर्जी है आपमें।" बस हो गई दोस्ती। Compliment किसे पसंद नही आता? अब इसतरह सबकी तारीफ करने के पिछे उनका कोई स्वार्थ तो होगा नही क्यों कि enjoy करने के लिए उनका अपना ग्रुप था और सब जानते थे कि छह दिन बाद हर एक को अपने रास्ते निकलना है। शायद उनकी नज़र हि इतनी साफ थी कि केवल अच्छाई को हि परखती थी और दिल इतना बड़ा कि अच्छाई की तारीफ करने से अपने आप रोक नही पाती थी और बस माहौल खुशनुमा और दोस्ती भरा हो जाता था। मार्क ट्वेन का कथन है, 'I can live for two months on a good co...