संदेश

काॅम्प्लिमेंटस्

कुछ वर्ष पहले एक all women group के साथ दुबई प्रवास किया था। सभी महिलायें विभिन्न आयु गट की थी। सब अपने अपने ग्रुप के साथ थी। कुछ अकेली भी थी। इनमें एक सदस्या ऐसी थी जो हर ग्रुप के साथ enjoy कर रही थी। हालांकि वह उम्र में सबसे बडी थी मगर सबसे छोटी सदस्या के साथ भी उनकी दोस्ती थी। इसका कारण शायद यह था कि उन्हे हर एक में कोई न कोई गुण नजर आता था। वे हर किसी को कुछ न कुछ compliment जरूर देती थी। किसी के ड्रेस पर तो किसी के बालों पर तो किसी के स्माईल पर। मुझ से भी उन्होंने कहा, "अरे, कितना फास्ट चलते हो आप। कितनी एनर्जी है आपमें।" बस हो गई दोस्ती। Compliment किसे पसंद नही आता? अब इसतरह सबकी तारीफ करने के पिछे उनका कोई स्वार्थ तो होगा नही क्यों कि enjoy करने के लिए उनका अपना ग्रुप था और सब जानते थे कि छह दिन बाद हर एक को अपने रास्ते निकलना है। शायद उनकी नज़र हि इतनी साफ थी कि केवल अच्छाई को हि  परखती थी और दिल इतना बड़ा कि अच्छाई की तारीफ करने से अपने आप रोक नही पाती थी और बस माहौल खुशनुमा और दोस्ती भरा हो जाता था। मार्क ट्वेन का कथन है, 'I can live for two months on a good co...

श्रेष्ठ दार्शनिक कबीर

चित्र
                                        जेष्ठ मास की पूर्णिमा संत कबीर दास की जयंती के रूप में मनाई जाती है जो इस वर्ष 2026 में 29 जून को मनाई गई। मेरे वाचन व्यासंग के प्रवास में कबीर दास जी के बारे में जो कुछ मैंने जाना और समझा उसका संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण।  पंद्रहवी सदी के इस महान भारतीय दार्शनिक का स्थान हिंदी भक्ति धारा के कवियों में बहुत उँचा है। कबीर दासजी की भाषा राजस्थानी, हरियाणवी, पंजाबी, खडी बोली, अवधी और ब्रजवासी के शब्दों की पंचमेल खिचड़ी है। इन सभी भाषाओं के शब्द प्रयोग करते हुए उन्होंने अपनी भाषा को सरल और सुबोध बनाया ताकि आम आदमी समझ सके। 'पोथी पढि पढि जग मुवा, पंडित भया न कोय।                             ढाई आखर प्रेम का, पढे सो पंडित होय।'                               इन शब्दों में प्रेम की महिमा बताने वाले कबीर ज...

ज्ञानगंगा

चित्र
                                          आज एक स्मार्ट फोन हाथ में है तो यह प्रश्न तो बचा नही कि समय कैसे काटे लेकिन अब 'क्या करें कि ना करें कैसी मुश्किल हाय' यह परीस्थिति उत्पन्न हो गई है। इसका कारण है उस स्मार्ट फोन के जरिए हम तक पहुँचने वाली अविरल ज्ञानगंगा। हर छोटी छोटी बात पर तरह-तरह का ज्ञान उपलब्ध है, जो हम सब रोज पढते हैं और समझ आता है उसमें बहुत हि विरोधाभास है। और सब बातों को छोड़िये मगर जो बातें हमें सीधे सीधे प्रभावित करती है जैसे खानपान, सेहत, व्यायाम आदि के बारे क्या जानकारी उपलब्ध है और उसमें कितना और क्या क्या विरोधाभास है यह देखते है। एक कहता है हर दो दो घंटे में खाना खाओ चाहे थोडा थोडा खाओ। दूसरा कहता है जब भूख लगे तब खाओ तो तिसरे का विचार है दिन में केवल दो हि बार खाओ चाहे हर बार 45 मिनट तक खाते रहो। सोचो जरा 45 मिनट में कितना खाना जा सकता है पेट में। अब हम बच्चे तो रहे नही कि 45 मिनट तक एक रोटि भी खत्म न हो और माँ डाँटती रह जाए,"खा न जल्दी।" कोई सलाह देगा दिनभर ...

मै वापस आऊंगा

सिनेमाघर में जाकर फिल्म देखना तो मैंने कब का छोड हि दिया है।एक जमाने में हर तरह की जद्दोजहद करके हर फिल्म देखने की मेरी पूरी कोशिश रहती थी। आज दस साल से अधिक हो गए घर के एकदम पास हि माॅल और थियेटर बने हुए मगर अबतक दो हि फिल्मे देखी है। अब इसमें मेरी उम्र का कसूर है कि आजकल की फिल्मों का पता नही। या फिर OTT platforms का योगदान रहा होगा। स्मार्ट बाज़ार से निकलते समय पोस्टर पर नसीरूद्दीन शाह और दिलजीत दोसांज के चेहरे देखे और इम्तियाज अली का नाम पढा तो उत्सुकता जागी। 'मैं वापस आऊंगा' नाम से तो love story लग रही थी। मिडिया में फिल्म की कोई चर्चा भी नही थी तो मन में अच्छी या बुरी ऐसी कोई धारणा भी नही थी। लगा कि शायद भीड भी न हो। तो एक accidental movie watching का कार्यक्रम बन गया। आशा के विपरित अच्छी खासी भीड थी। फिल्मों के प्रचलित सांचे की तरह इस  फिल्म में नायक या खलनायक कोई नही। फिल्म का कथानक जो देश के विभाजन से जुडा है, वही है सबकुछ। फिल्म को प्रेम कहानी कह सकते है जो अपने अस्तित्व से प्रेम की बात कहती है। फिल्म में संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है जो शांत, सुकून भरा और सुमधुर है। ...

स्पर्श का जादू

आजकल एक चाय का विज्ञापन चल रहा है जिसमें एक नेत्रहीन व्यक्ती कहता है, "हमें सुगंध से पता चलता  है कि अच्छी है या नही।" वाकई उन्हे प्रकृति द्वारा यह देण मिली है। साथ हि स्पर्श के बारे में भी वे काफी संवेदनशील होते है। वैसे स्पर्श का करिश्मा तो हम सभी हर घडी अनुभव करते है। स्कूल में ज्ञानेंद्रियों के बारे में पढते हुए बस यही जाना कि स्पर्श में न शब्दों की आवश्यकता है ना भाषा की। नवजात शिशु माँ की गोद में आते हि रोना बंद करता है क्यों कि वह उस स्पर्श को तब से पहचानता है जब से माँ के गर्भ में स्थित था। उस नवजात का स्पर्श भी कितना मुलायम, एकदम मक्खन सा। और माँ का स्पर्श? ममता से भरा हुआ, संवेदनशील। वही पिता का स्पर्श आश्वासक, दुनिया जितने की प्रेरणा देने वाला। दादा दादी, नाना नानी के दुलार भरे स्पर्श सारी गलतियाँ नजरअंदाज कर के हौसला बढानेवाले।  जीवन का सबसे प्यारा रिश्ता मैत्री का। मित्र का स्पर्श आनंद और उत्साह देनेवाला। कितनी ही लडाईयां हो एक प्यार वाली झप्पी सारे गिले शिकवे दूर कर देगी। कितना हि संकट भरा समय हो कंधे पर मित्र का स्पर्श और 'all is well ' के शब्द।  आप संक...

यु.ए.ई. प्रवास

चित्र
                                               अपने बेटे और पति को बाय कहते हुए मैंने मुंबई एयरपोर्ट के भीतर प्रवेश किया और दिल की धड़कन तेज़ हुई। अपने परिवार के साथ सुरक्षितता से ढेर सारा भ्रमण कर लेने के बाद आज मै वीणा वर्ल्ड के लेडिज स्पेशल टूर पर अकेले निकली थी। चेक इन के पास हमारे टूर मॅनेजर अक्षय वैद्य मिले। डिनर की व्यवस्था एयरपोर्ट पर हि थी जहाँ भावना मिली। वो भी अकेली थी। साथ डिनर कीया। दिल की धड़कन अब काबू में थी। फ़्लाईट में आशा एन सी साथ बैठी थी। आबूधाबी एयरपोर्ट पर बस के साथ हमारे टूर गाईड अक्षय पवार मिले। बस में सब की सीटस् अलाॅटेड थी। मेरे साथ रश्मि थी। अगले छः-सात दिन बस में रश्मि और रूम में आशा मेरी साथीदार थी। वे दोनों भी मुझ जैसे हि अकेली आई थी। शाम की introduction party में पता चला कि चालीस के ग्रुप में उन्नीस महिलाएं अकेले ही आई थी और रहा सहा डर उडणछू हो गया। रैम्प वाॅक के विनर्स में एक पच्चीस वर्ष के आसपास, एक पैतीस के आसपास तो एक सत्तर के आसपास म...

दादादादी, छोडो डर बनो स्मार्ट।

चित्र
थोडे दिन पहले हम स्कूल के जमाने की कुछ सहेलियां हम में से हि एक के घर पर इकट्ठा हुई थी। सभी साठ साल से अधिक आयु की। लंच का कार्यक्रम था। सबने एक एक व्यंजन बनाया था। गप्पें मारते हुए, एक दूसरे के हाथ का स्वाद चखते हुये भोजन तो बढ़िया से हो गया। आराम फ़रमाते हुए एक ने कहा कुल्फी होती तो मजा आता। दूसरी के मुँह से निकला पान भी आ जाता तो सोने पे सुहागा। निचे चौक पर हि सब मिल जाता है पर कौन जायें और लायें। मैंने तुरंत अपना स्मार्ट फोन निकाला और दोनों चीजों का बंदोबस्त किया। सबने कुल्फी और पान का आस्वाद लेते हुए मेरी खूब वाहवाही की। सबका कहना था ये काम तो हमारे बच्चे हि करते हैं। वैसे तो स्मार्ट फोन सभी के पास था। मगर उसका उपयोग नाती पोतों से वीडियो कॉल करना, दोस्तों के साथ WhatsApp chat और पोस्ट का आदान-प्रदान, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि सोशल मीडिया पर रीलस् देखना इन कामों के लिए हि होता था। जिनकी उँगलियों में दर्द है वे मेसेज लिखने के बदले voice messages करेंगे वो भी बच्चों ने सिखाया है तो। कोई एक स्टेप आगे है तो  u tube पर कुकिंग और beauty टिप्स देखेंगे या Ott पर फिल्म या सिरिज देखेंगे। उ...