स्पर्श का जादू
आजकल एक चाय का विज्ञापन चल रहा है जिसमें एक नेत्रहीन व्यक्ती कहता है, "हमें सुगंध से पता चलता है कि अच्छी है या नही।" वाकई उन्हे प्रकृति द्वारा यह देण मिली है। साथ हि स्पर्श के बारे में भी वे काफी संवेदनशील होते है। वैसे स्पर्श का करिश्मा तो हम सभी हर घडी अनुभव करते है। स्कूल में ज्ञानेंद्रियों के बारे में पढते हुए बस यही जाना कि स्पर्श में न शब्दों की आवश्यकता है ना भाषा की। नवजात शिशु माँ की गोद में आते हि रोना बंद करता है क्यों कि वह उस स्पर्श को तब से पहचानता है जब से माँ के गर्भ में स्थित था। उस नवजात का स्पर्श भी कितना मुलायम, एकदम मक्खन सा। और माँ का स्पर्श? ममता से भरा हुआ, संवेदनशील। वही पिता का स्पर्श आश्वासक, दुनिया जितने की प्रेरणा देने वाला। दादा दादी, नाना नानी के दुलार भरे स्पर्श सारी गलतियाँ नजरअंदाज कर के हौसला बढानेवाले। जीवन का सबसे प्यारा रिश्ता मैत्री का। मित्र का स्पर्श आनंद और उत्साह देनेवाला। कितनी ही लडाईयां हो एक प्यार वाली झप्पी सारे गिले शिकवे दूर कर देगी। कितना हि संकट भरा समय हो कंधे पर मित्र का स्पर्श और 'all is well ' के शब्द। आप संक...