श्रेष्ठ दार्शनिक कबीर
जेष्ठ मास की पूर्णिमा संत कबीर दास की जयंती के रूप में मनाई जाती है जो इस वर्ष 2026 में 29 जून को मनाई गई। मेरे वाचन व्यासंग के प्रवास में कबीर दास जी के बारे में जो कुछ मैंने जाना और समझा उसका संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण। पंद्रहवी सदी के इस महान भारतीय दार्शनिक का स्थान हिंदी भक्ति धारा के कवियों में बहुत उँचा है। कबीर दासजी की भाषा राजस्थानी, हरियाणवी, पंजाबी, खडी बोली, अवधी और ब्रजवासी के शब्दों की पंचमेल खिचड़ी है। इन सभी भाषाओं के शब्द प्रयोग करते हुए उन्होंने अपनी भाषा को सरल और सुबोध बनाया ताकि आम आदमी समझ सके। 'पोथी पढि पढि जग मुवा, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढे सो पंडित होय।' इन शब्दों में प्रेम की महिमा बताने वाले कबीर ज...