भारतीय कठपुतलि जगत
'जहाँ मैं जाती हूँ वहीं चले आते हो...'! 'कठपुतलियाँ' शब्द सुनते हि, मुझे 'चोरी चोरी' फिल्म यह का गाना याद आता है जिसमें राज कपूर और नरगिस हुबहू कठपुतलियों की तरह नाचते हैं। बहुतों ने इस गाने के जरिए पहली बार कठपुतलियों को जाना। विभिन्न कलाओं का मिश्रण कठपुतली कला एक प्राचीन कला है। ईसा पूर्व चौथी शताब्दीमें महाकवि पाणिनी के अष्टाध्यायी ग्रंथ में पुतला नाटक का उल्लेख मिलता है। कठपुतली कला के प्रदर्शन में किसी विषय को लकडी की पुतलियों का उपयोग करके नाटक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है अतः संवाद लेखन महत्वपूर्ण है। नाटक के किरदारों के अनुरूप उनकी वेशभूषा होती है। कठपुतलियों के चेहरे मिट्टी या प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनें होते हैं और उन्हें किरदारों के अनुरूप सजाया जाता हैं। प्रसंगों के अनुसार नेपथ्य की चित्रकारी होती है। इसतरह कठपुतली कला में गीत, संगीत और नृत्य के साथ साथ नाटक, लेखन, काष्ठकला, मूर्तिकला, चित्रकला, रूपसज्जा आदि विभिन्न कलाओं का मिश्रण होता है। भारतीय पुतली कला के प्रकार धागा पुतली: कठपुतली के अलग-अलग अंगों को कुछ इसप्रकार जोड़ा जाता है ताकि प्र...