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मै वापस आऊंगा

सिनेमाघर में जाकर फिल्म देखना तो मैंने कब का छोड हि दिया है।एक जमाने में हर तरह की जद्दोजहद करके हर फिल्म देखने की मेरी पूरी कोशिश रहती थी। आज दस साल से अधिक हो गए घर के एकदम पास हि माॅल और थियेटर बने हुए मगर अबतक दो हि फिल्मे देखी है। अब इसमें मेरी उम्र का कसूर है कि आजकल की फिल्मों का पता नही। या फिर OTT platforms का योगदान रहा होगा। स्मार्ट बाज़ार से निकलते समय पोस्टर पर नसीरूद्दीन शाह और दिलजीत दोसांज के चेहरे देखे और इम्तियाज अली का नाम पढा तो उत्सुकता जागी। 'मैं वापस आऊंगा' नाम से तो love story लग रही थी। मिडिया में फिल्म की कोई चर्चा भी नही थी तो मन में अच्छी या बुरी ऐसी कोई धारणा भी नही थी। लगा कि शायद भीड भी न हो। तो एक accidental movie watching का कार्यक्रम बन गया। आशा के विपरित अच्छी खासी भीड थी। फिल्मों के प्रचलित सांचे की तरह इस  फिल्म में नायक या खलनायक कोई नही। फिल्म का कथानक जो देश के विभाजन से जुडा है, वही है सबकुछ। फिल्म को प्रेम कहानी कह सकते है जो अपने अस्तित्व से प्रेम की बात कहती है। फिल्म में संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है जो शांत, सुकून भरा और सुमधुर है। ...