स्पर्श का जादू
आजकल एक चाय का विज्ञापन चल रहा है जिसमें एक नेत्रहीन व्यक्ती कहता है, "हमें सुगंध से पता चलता है कि अच्छी है या नही।" वाकई उन्हे प्रकृति द्वारा यह देण मिली है। साथ हि स्पर्श के बारे में भी वे काफी संवेदनशील होते है। वैसे स्पर्श का करिश्मा तो हम सभी हर घडी अनुभव करते है।
स्कूल में ज्ञानेंद्रियों के बारे में पढते हुए बस यही जाना कि स्पर्श में न शब्दों की आवश्यकता है ना भाषा की। नवजात शिशु माँ की गोद में आते हि रोना बंद करता है क्यों कि वह उस स्पर्श को तब से पहचानता है जब से माँ के गर्भ में स्थित था। उस नवजात का स्पर्श भी कितना मुलायम, एकदम मक्खन सा। और माँ का स्पर्श? ममता से भरा हुआ, संवेदनशील। वही पिता का स्पर्श आश्वासक, दुनिया जितने की प्रेरणा देने वाला। दादा दादी, नाना नानी के दुलार भरे स्पर्श सारी गलतियाँ नजरअंदाज कर के हौसला बढानेवाले।
जीवन का सबसे प्यारा रिश्ता मैत्री का। मित्र का स्पर्श आनंद और उत्साह देनेवाला। कितनी ही लडाईयां हो एक प्यार वाली झप्पी सारे गिले शिकवे दूर कर देगी। कितना हि संकट भरा समय हो कंधे पर मित्र का स्पर्श और 'all is well ' के शब्द। आप संकट का सामना करने के लिए फिर से तैयार। रुग्णशैय्या पर लेटे हुए व्यक्ति का हाथ सहलाकर आप उसकी शारीरिक पीडा को भले हि कम न कर पाए पर मन को सांत्वना अवश्य हि दे सकते है।
प्रकृति तो न जाने कितनी तरह से अपने मन को छू जाती है। पहली बारिश की बूंदे मन को आल्हादित कर देती है। समुद्र किनारे टहलते समय गिली रेति और पैरों से लिपटने वाली हल्की हल्की लहरें मानो आपके आने से आनंदित होकर अपना सुख दुख आपसे बांट रही हो। और उसी समुद्र की ऊँची लहरे जब आपको भिगोती है, मानो आनंद का उफान। वह भी एक अलग अनुभूति, एक अलग हि स्पर्श।
पेड, पत्ते और फूलों के स्पर्श भी कितने आनंददायक होते है। फल या फूल तोड़ते समय खींचातानी न करते हुए प्यार से तोड़िये, लगेगा पौधे भी उतने हि प्यार से प्रतिसाद दे रहे है। एक प्यार भरा रिश्ता निर्माण हो जायेगा। केवल छूने भर से ताजी सब्जियाँ और फल छांटनेवाली सुघड गृहिणियों के स्पर्श ज्ञान के तो क्या हि कहने?
पहले शादियों में बर्तन गिफ्ट देते थे जिन पर देनेवालों के नाम होते थे। किचन में बर्तन पोंछकर लगाते समय पडोस की चाची या मौसी का नाम पढकर उनकी याद तो आ हि जाती है। हर गृहिणी के किचन में कुछ न कुछ तो होता हि है सास का या दादी का दिया हुआ जिस पर हाथ फेरने से उनकी याद आ जाए।
कभी कभी अलमारी ठीक करते समय किसी साडी पर बरबस हाथ रुक जाता है और उसे सहलाने लगते है। वह साडी होती है माँ ने दि हुई। कोई सलवार सूट होता है भाई का दिया तो कोई दुपट्टा बिछडते समय सहेली ने दिया हुआ। ये सारी निर्जीव वस्तुएँ पर उनके स्पर्श हर उस रिश्ते को फिर से जिने का अहसास दिलाते है। आनंद की अनुभूति कराते है।
बस ये स्पर्श हिंसक और वासनाभरे ना हो। प्यारभरे और आश्वासक हो। स्पर्श में पाप नही शुद्धता हो। राग नही अनुराग हो। तभी बिना बोले हि सब कुछ कह पायेंगे।
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स्पर्श का जादू, दिल को छू लिया👌❤️
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