पारंपरिक भारतीय साडियाँ भाग - 2
इस लेख के प्रथम भाग में हमने चर्चा की थी बनारसी, कांजीवरम, पैठणी, बालूचेरी, पटोला और कोसा साडियों की। लेख के इस भाग में हम महिलाओं की प्रिय साड़ी के कुछ और प्रकारों के बारे में जानतें हैं।
संभलपुरी ईकत साड़ी
ईकत साड़ी ओडिशा के बारगढ, सोनपुर, संभलपुर, बालनगीर और बौद्ध जिले में बनती है तथा हस्तनिर्मित होती है । धागों को डिजाइन के अनुसार बांध कर अवरोध रंगाई यानि टाई एण्ड डाई किया जाता है। फिर इन धागों से हॅण्डलूम पर बुनाई होती है। पहले केवल जगन्नाथ जी के चेहरे के रंग यानि लाल, काला और सफेद का मुख्य रूप से प्रयोग होता था और शंख, चक्र, फूल आदि प्रतिक बनते थे। आजकल सभी रंगों का प्रयोग होता है और तरह तरह के डिजाइन बनते हैं। संभलपुरी ईकत के कई प्रकार हैं जैसे कटकी, बोमकाई, पट इत्यादि और यह सूती और रेशमी दोनों ही तरह की बनती है।
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| संभलपुरी ईकत साड़ी |
चंदेरी साड़ी
मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित चंदेरी शहर यहाँ बननेवाली साड़ियों की वजह से प्रसिद्ध है।वर्तमान में चंदेरी में तीन तरह के फैब्रिक बनते हैं। प्योर सिल्क, चंदेरी काॅटन और सिल्क काॅटन। यद्यपि चंदेरी का इतिहास वैदिक युग में मिलता है, इसकी उत्पादन प्रक्रिया ने उत्क्रांती के कई दौर देखें। 1890 में बुनकरों ने हाथ से बने धागों के बजाए मिल मेड धागों का उपयोग शुरू किया। 1970 के आसपास बुनकर ताना काॅटन का और बाना सिल्क का रखने लगे। इस वजह से चंदेरी कपड़ा पहले से मजबूत हुआ। चटाई,जंगला, मेहंदी वाले हाथ, नलफर्मा और डंडीदार जैसे चंदेरी साड़ी के पैटर्न अधिक लोकप्रिय है।
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| चंदेरी साड़ी |
बन्धेज या बान्धनी साड़ी
बन्धेज या बान्धनी साड़ी राजस्थान की विशेषता है। बान्धनी यानि सूक्ष्म रूप से बंधी गांठ। महीन वस्त्र में डिजाइन के अनुसार दानें रखकर कसकर गांठें बांधी जाती है फिर वस्त्र की रंगाई की जाती है। इसे अवरोध रंगाई या टाई एण्ड डाई कहते है। सूती और रेशमी दोनों ही कपड़ो पर बन्धेज या बान्धनी का काम होता है। बान्धनी के कई प्रकार हैं जैसे त्रिबूंदी, मोठ़डा, धनक, पोमचा, लहरिया, डाबू, लाडू, पतंगा, चोखाना आदि।
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| बन्धेज या बान्धनी साड़ी |
कसावू साड़ी
केरल राज्य की पहचान कसावू साड़ी हथकरघे पर बना हुआ नरम सूती कपड़ा है। कहा जाता है कि कसावू साड़ी की परंपरा बुद्ध के काल से चली आ रही है। मूल कसावू साड़ी के दो भाग होते हैं; मुंडु और वेशी। मुंडु शरीर के उपरी हिस्से पर लपेटा जाता है और वेशी को शरीर के निचले हिस्से पर लपेटा जाता है। आधुनिक स्त्रीयाँ सिंगल पीस कसावू साड़ी हि पहनना पसंद करती हैं। आजकल लाल और हरे रंग के मोटीफ भी कसावू साड़ी पर बनने लगे हैं। हथकरघे की जगह पावरलूम आने से कसावू साड़ी की बनावट में थोड़ा बदलाव आया है परंतु मशीन से उत्पादन अधिक होने के कारण कसावू साड़ी की कीमतें थोड़ी कम हुई है।
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| कसावू साड़ी Image by Jigesh at Malayalam Wikipedia is licensed under the Creative Commons Attribution-Share Alike 3.0 Unported license |
पोचमपल्ली साड़ी:
पोचमपल्ली साड़ी तेलंगना राज्य में 80 गाँवों को मिला कर बनायें गए पोचमपल्ली क्लस्टर में हथकरघे पर बनाईं जातीं हैं।पोचमपल्ली क्लस्टर में जगह जगह हजारों हथकरघे लगें हैं तथा इसे युनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में "भारत की प्रतिष्ठित साड़ी बुनाई क्लियरिंग के भाग" के रूप में जगह मिली है। एअर इंडिया ने भी अपने केबिन क्रू की महिलाओं के लिए पोचमपल्ली साड़ी का चयन किया हुआ है। पोचमपल्ली साड़ी इकत रंगाई का हि एक प्रकार है। पोचमपल्ली साड़ी सूती, रेशमी और सिको ( सिल्क + काॅटन) के कपड़ो में उपलब्ध है।
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| पोचमपल्ली साड़ी Image by Balaraju. This file is licensed under the Creative Commons Attribution-Share Alike 3.0 Unported license. |
मुगा सिल्क साडी
मुगा सिल्क साड़ी असम की पहचान है। ये बहुत ही टिकाऊ होने के साथ ही इनमें प्राकृतिक रूप से एक स्वर्णिम आभा होती है अतः मूगा सिल्क साड़ी की चमक उसे राजसी रूप देती है। यह वस्त्र प्राचीन काल में केवल राजघराने के उपयोग के लिए होता था। असम में बननेवाले इरी और पट सिल्क आम लोगों के लिए होते थे। मुगा सिल्क साड़ी हॅण्डवाॅश कर सकते है तथा प्रत्येक धुलाई के साथ इसकी चमक बढती है।
साड़ी की लोकप्रियता का एक सबूत तो यह भी है कि लेख के दोनों भागों में प्रदर्शित अधिकतर चित्र मुझे मेरे और मेरी सहेलियों के वाॅर्डरोब से हि मिलें। अब आपकी नज़र गई होगी अपनी अलमारी पर जिसमें होगी घाटचोला, तांत सिल्क, नारायणपेठ या इरकल। सूची तो बहुत लंबी है।
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This part is also very good and indeed made us check our collection of these beautiful sarees. Magnificent, please keep writing , always eager to read your blogsand your unique style of writing and presentation
जवाब देंहटाएंये सभी साड़ियाँ सचमुच बहुत सुंदर होती हैं,पर विस्तृत जानकारी आपने दी ।बहुत अच्छा लिखा-बधाई 🌷
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