छोटे बच्चों की लेखन समस्याएँ

                   

एक ट्यूशन शिक्षिका के रूप में, मेरे पास विभिन्न विद्यालयों के कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थी आते है। अतः विभिन्न परिस्थितियों में पले बढ़े छात्रों से मिलने के पर्याप्त अवसर मुझे मिले । मैंने बच्चों की समस्याओं को बारीकी से देखा है, हमेशा उनके माता-पिता के साथ चर्चा की और समाधान को खोजने की कोशिश की। 

छोटी कक्षाओं के छात्रों के साथ एक आम समस्या यह है कि बच्चा पर्याप्त तेज़ी से लिखने में सक्षम नहीं है। उसकी लेखन में कोई गति नहीं है। क्लासवर्क और होमवर्क कभी पूरा नहीं होता है। एक और आम समस्या यह है कि लेखन स्पष्ट नहीं है। लेखन बहुत हल्का है।

यह समस्या पकड़ से संबंधित है। बच्चा पेंसिल को ठीक से नहीं पकड़ रहा है इसलिए वह पर्याप्त गति से नहीं लिख पा रहा है। और बच्चा लिखते समय पर्याप्त बल लागू नहीं कर रहा है, इसलिए लेखन इतना स्पष्ट नहीं है। 

बेहतर लेखन के लिए पेन या पेंसिल को उसकी नोंक से डेढ़ इंच दूर पकडना चाहिए और पकड़ कोमल लेकिन दृढ़ होनी चाहिए।

हम इस समस्या से निपटने के लिए कुछ गतिविधियां कर सकते हैं। ये गतिविधियां बच्चे को पकड़ में सुधार करने और गति और स्पष्टता में सुधार करने में मदद करेंगी। 

सबसे पहली गतिविधि के तहत अपने बच्चे को मोती की एक स्ट्रिंग दें और अंगूठे और तर्जनी के बीच मोती को पकड़कर  एक-एक करके खींचने और गिनने को कहे। ऐसा करने से बच्चे की उँगलियों को पेन या पेंसिल को पकड़ने का अभ्यास होगा।

दूसरी गतिविधि के अंतर्गत पेपर की एक शीट पर कोई भी आकार खींचें और उस पर कुछ डॉट्स को चिह्नित करें। फिर बच्चे को बिंदियाँ का एक पत्ता दें और बच्चे से हर एक स्पॉट पर एक एक बिंदि को चिपकाने के लिए कहें। इस गतिविधि को करने से भी बच्चे की उँगलियों की पकड में सुधार होगा।

तीसरी एक ट्रेसिंग गतिविधि है। कागज की एक शीट पर बिंदीदार रेखाओं के साथ कुछ आकार खींचें और बच्चे को इन आकृतियों पर पेन या पेंसिल घुमाते हुए ड्रा करने के लिए कहें। आप इस गतिविधि से एक खेल बना सकते हैं। एक ही डिजाइन की अधिक प्रतियाँ बनाएं और बच्चे को और उसके दोस्तों को एक प्रतिस्पर्धा के रूप में खेलने दें कि चलो हम देखते हैं कि कौन सबसे तेज करता है। माता-पिता इस खेल को स्वयं भी  बच्चे के साथ खेल सकते हैं। आकृतियों पर इस गतिविधि का अभ्यास करने के बाद, इसे वर्णमाला पर आज़माएं। 

सबसे पहली और दूसरी गतिविधि बच्चे की पकड़ में सुधार करने में मदद करेगी। तीसरी गतिविधि लेखन की गति में सुधार करने में मदद करेगी। 

इन गतिविधियों के साथ ही खड़ी, आड़ी और तिरछी रेखाओं का तथा गोलाकार का अभ्यास, उचित दबाव के साथ करने से भी हस्तलेखन में सुधार लाया जा सकता है। 

यह भी सुनिश्चित करें कि बच्चा लेखनकार्य के दौरान कुर्सी पर सही तरीके से बैठता है और लेखन के लिये योग्य ऊँचाई की मेज़ का उपयोग करता है। लिखते समय कोहनियों से लेकर दोनों हाथ मेज़ पर स्थित हो और जो हाथ लिखने में व्यस्त नही है उसे पेपर या काॅपी के उपरी हिस्से पर रखे ताकि पेपर हिले नही। इस तरह चौकस होकर बैठने से बच्चा अपना लेखनकार्य अधिक ध्यान देकर कर पायेगा और उसका हस्तलेखन सुंदर तथा सुवाच्य होने में मदद मिलेगी।

इसी संदर्भ में एक किस्सा बताना चाहूँगी। मेरा एक छात्र आर्यन, जो दुसरी कक्षा में पढ़ता था, कुछ भी लिखना नहीं चाहता था। वह केवल गणित का क्लासवर्क और होमवर्क करता था। 

वह एक होशियार और स्मार्ट लड़का था। वह बहुत स्पष्टता से पढ़ रहा था। हर विषय का उसका ज्ञान सही था। वह अपने पाठ्यक्रम से संबंधित सभी प्रश्नों का सही जवाब दे रहा था लेकिन वह एक शब्द भी लिखने के लिए तैयार नहीं था। 

एक हफ्ते के बाद, उसने न लिखने का कारण दिया। उसने कहा, "मेरी लिखावट मेरे भाई जैसी सुन्दर नहीं है। मैं जो कुछ भी लिखता हूँ, माँ को पसंद नहीं आता है। वह उसे मिटाती है और मुझे बार-बार लिखने के लिए कहती है, इसलिए मैं लिखना हि नहीं चाहता"। 

असल में आर्यन का बड़ा भाई छठीं  कक्षा में पढ़ रहा था। वह भी मेरा छात्र था। मुझे पता था कि बड़े भाई की लिखावट बहुत अच्छी थी। उनकी मां इस छोटे बच्चे से भी यही उम्मीद कर रही थीं। वह भूल गई कि सभी पाँचो उंगलियां समान नहीं होती हैं। यह छोटा बच्चा इस दबाव को सहन करने में सक्षम नहीं था और उसकी प्रतिक्रिया थी, "मैं अपने भाई की तरह अच्छा नहीं लिख पा रहा हूं। माँ मेरी लिखावट पसंद नहीं करती हैं इसलिए मैं बिल्कुल नहीं लिखूंगा"।

तात्पर्य यह है कि एकदम शुरुआत में हि सुन्दर लिखावट के लिये बच्चे पर अधिक जोर न दें। अन्यथा बच्चा इस बात को लेकर तणावग्रस्त हो सकता है। बच्चा जब पाँचवी या छठीं कक्षा में आ जायेगा और सुन्दर लिखावट के महत्व को जानेगा तब वह स्वयं ही सुन्दर लिखावट के लिए प्रयास करेगा। उस समय, उपरोक्त सभी बातों को ध्यान में रखते हुए आप उसकी मदद कर सकते हैं।

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टिप्पणियाँ

  1. बहुत शिक्षाप्रद लिखा ,सच छोटे बच्चों को लिखावट के लिए ज्यादा नही बोलना चाहिए ।

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