महाराष्ट्र की खाद्य संस्कृति भाग 3
इस लेख के प्रथम और द्वितीय भागों में हमने चर्चा की थी कोंकण, मुंबई, मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के खानपान की। इस भाग बारी है खानदेश और विदर्भ की।
खानदेश की खाद्य संस्कृति
महाराष्ट्र का अहमदनगर, नाशिक, धुळे, जळगाव, नंदुरबार यह सारा प्रदेश खानदेश कहलाता है। यहाँ के मांसाहारी और शाकाहारी दोनों ही तरह के व्यंजन इतने तीखे होते हैं कि नाक-कान से धुआँ निकले और आँखों से पानी। इतना अधिक तीखे का शौक कि हरी मिर्च की भी सब्जी बनती है।
हरी मिर्च की सब्जी मैंने अपनी आंध्र प्रदेश की एक सहेली के घर भी खाई थी। उसने हरी मिर्चों को इमली के रसके साथ पकाया था। खानदेश में हरी मिर्च के टुकड़े और अरहर की दाल समान मात्रा में लेकर पकाते हैं। साथ में कमरख के पत्ते और टमाटर का भी प्रयोग होता है। इसे डाळ गंडोरी कहते है।
जळगाव के भरते वाले बैंगन लोकप्रिय है। वैसे खानदेश में निनवा या तरोई का भी भरता बनता है। कुछ और पदार्थ इसप्रकार है।
भेंडके: अरहर की दाल का रवा बना कर उसका इडली जैसा व्यंजन।
एडमी: मूँग दाल के डोसे।
खानदेशी खिचड़ी: खानदेश में अरहर दाल की खिचड़ी बनती है। गरम तेल में लहसुन और मिरची लाल करते हैं। यह तेल खाते समय खिचड़ी के उपर परोसते है।
गेहूं की खीर: गेहूँ को 10-12 घंटे भिगाकर उन्हें अंकुरित करते हैं और कुकर में पानी के साथ उबालते है। फिर इस मिश्रण को दूध के साथ उबाल कर गाढा करते है और चिनी , पिसी इलायची और ड्राय फ्रूटस् डालते हैं।
फौजदारी दाल, केले की सब्जी, सेव की सब्जी, बेर की सब्जी, पूरी जैसे दिखने वाले उडद दाल के वडे, दाल बट्टी, सारे हि एक से एक स्वादिष्ट पदार्थ खानदेश की खासियत है।
विदर्भ की खाद्य संस्कृति
विदर्भ, महाराष्ट्र का सबसे बड़ा उपक्षेत्र है, जिसमें ग्यारह जिले हैं। विस्तृत होने के कारण विविधता भी बहुत है। गडचिरोली, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा जिलों में चावल की पैदावार बहुतायात में होती है अतः चावल के पदार्थ भी खूब बनते हैं। भजीभात, वड़ाभात, भरडाभात, गोळाभात, फोडणीचा भात, वांगीभात, तोंडली (कुंदरू)भात, बेसन भात और भी बहुत सारे चावल बनाने के तरीके हैं। नया चावल निकलता है तब लहसुन के हरे पत्तों के साथ पीस कर चावल के आकशे (चिले) भी बड़े स्वादिष्ट बनते हैं।
विदर्भ एक गरम प्रदेश हैं और गरमी में तापमान 47 या 48 डिग्री तक पहुँचता है। अतः धूप में सुखा कर संग्रह करने वाले पदार्थ भी बहुत बनायें जाते हैं जैसे मूँग वडी, उडद वडी, सांडगे, सरगुंडे, कुरडई, धापोडे, दही मिरची, तरह तरह के पापड इत्यादि। पहले आजकल की तरह सारी सब्जियां हर मौसम में नही मिलती थी अतः बैंगन, टमाटर, गोभी, मेथी जैसी सब्जियां धूप में सुखा कर संग्रह करते थे। इन्हें खुलां कहते थे।
विदर्भ में समुद्र किनारा नहीं है मगर नदियाँ और तालाब बहुत सारे है।इसलिए मीठे पानी में मिलनेवाली मछलियाँ काफी मिलती हैं।
त्यौहारों तथा समारोहों में पुरणपोळी, खवापोळी, आमरस पुरी, श्रीखंड पुरी, सेवई की खीर आदि व्यंजन बनते हैं। विदर्भ की पुरणपोळी थोड़ी मोटी होती है। जितनी बड़ी आटे की गोली उसके 3 या 4 गुना पुरण की गोली लेकर आटे में भरते है। इसलिए उपर का आटे का आवरण एकदम पतला बनता है।
विदर्भ के कुछ लोकप्रिय व्यंजन
लंबी रोटी: ये रोटियाँ बनाने के लिए अत्यधिक कुशलता की आवश्यकता है। इनका आटा बनाने का विशिष्ट तरीका है। आटा गूँथ कर उसपर थोड़ा तेल थोड़ा पानी लेते हुए, पूरे के पूरे आटे को एकसाथ उठाकर परात में पटकते हुए यह आटा बनाते है। आटा जब आवश्यकता के अनुसार लचीला बन जायें तब हाथ पर फैला कर, आँच पर उलटे रखे हुए मटके पर डालकर ये रोटियाँ बनाईं जातीं हैं। चिकन, मटन या आमरस के साथ लंबी रोटी खाने की प्रथा है। लंबी रोटी बनाने में महार समाज की महिलाएं माहिर होती हैं और कई महिलाओं के लिए यह व्यवसाय का साधन है।
सांबारवडी: बेसन के आवरण में हरा धनिया, नारियल बुरादा, खसखस आदि का स्वादिष्ट सारण भर के इस वडी को खुले तेल मे तलते है
सावजी रस्सा: विदर्भ में बसे हुए बुनकर समाज को सावजी कहते है। गरम मसालों को पानी में उबालकर फिर पीसा जाता है। मुख्यतः मांसाहारी भोजन सावजी पद्धति से बनता है। आजकल पाटौडी रस्सा जैसे शाकाहारी पदार्थ भी सावजी तरीके से बनते हैं। सावजी भोजन थोड़ा तिखा होता है।
लाल कुम्हडे के बोंडं, लौकी और चावल के आटे के वडे, रोडगे, घुग-या, आंबील, शक्करकंद की मीठी पूरी जिसे कानगरी कहते है आदि और भी कई व्यंजन है जो विदर्भ की पहचान है।
ऐसी है महाराष्ट्र की खाद्य संस्कृति जिसमें तीखे मसालेदार और मीठे का स्वादिष्ट संगम है।
___________________
बहुत अच्छी जानकारी मिली । इतने सारे व्यंजन,हमे तो मालूम भी न थे बहुत से । हर जगह के खान-पान व स्वाद में कितनी भिन्नता है..मौका मिलने पर ज़रूर taste करूंगी 👌🍁
जवाब देंहटाएंगव्हाची खीर बनवून बघितली खुपच testy झाली
जवाब देंहटाएंविर्द्रभात अमरावती बुलढाना sideला गव्हाच्या पिठाच्या बिट्या हा पदार्थ
सूटला कृपया तो add करावा