भीमबेटका शैलाश्रय
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| भीमबेटका शैलाश्रय के शैलचित्र फोटो क्रेडिट: असित जैन / शटरस्टॉक (सैनिक, उत्सव, सूअर, मवेशी और हिरण), ज़ैक ओ'वाई (बाइसन, मैन एंड बर्ड), फ्रेडेरिक सोलटन / टेरा / कॉर्बिस / इमेजिबिलिटीज़ (हाथी)। |
भारत में करीब 10,000 ऐसे स्थान हैं जहाँ गुफाओं में भित्तिचित्र तथा शैलचित्र पायें गये हैं। इन्हीं स्थानों में एक है भीमबेटका। ऐसा कहा जाता है कि पांडव वनवास में थे तब यहाँ गये थे। जिस जगह पर भीम बैठे उस जगह को भीमबैठका कहाँ जाने लगा। धीरे-धीरे भीमबैठका का रूपांतरण भीमबेटका में हुआ।
अपने सात साल के मध्यप्रदेश के वास्तव में तो नही परंतु अभी कुछ पारिवारिक मित्रों के साथ इस अप्रतिम धरोहर को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
भीमबेटका शैलाश्रय भारत में मध्यप्रदेश के रायसेना जिले में रातापानी वन्यजीव अभयारण्य में स्थित है। भोपाल से भीमबेटका की दूरी केवल 45 किमी है। भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी होने के कारण देश के सभी प्रमुख शहरों से रेल, बस और हवाई मार्ग से भलीभांति जुडा हुआ है। अतः अत्यंत सुगमतापूर्वक यहाँ पहुँचा जा सकता है।
शैलचित्रों की खोज
पुरातत्ववेत्ता डाॅक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा 1957 - 58 में भीमबेटका शैलाश्रयों की खोज की गई। इस काम के लिये वाकणकर जी को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। भीमबेटका में करीब 600 से अधिक प्रागैतिहासिक शैल गुफाएँ है जिनमें से करीब 350 गुफाओं की दिवारों पर ऐसे चित्र है जो हजारों साल पुराने हैं। इन चित्रों का परिक्षण कार्बन डेटिंग पद्धति से करके इनके निर्माण के कालखंड का अनुमान लगाया गया। भीमबेटका शैलाश्रयों में पुरापाषाणयुग से लेकर मध्ययुग तक के शैलचित्र पायें गये हैं। ये चित्र भारतीय उपमहाद्वीप में मानव जीवन के सबसे पुरातन प्रमाण है।भीमबेटका शैलाश्रय में केवल 12 गुफाएं लोगों को देखने के लिए खुली है। इन 12 गुफाओं में जो सबसे पुराना चित्र है वो 15,000 वर्ष पुराना है। भीमबेटका शैलाश्रय चारों ओर से विन्ध पर्वत मालाओंसे घिरा हुआ है ।
गुफाओं में भित्तिचित्र होने के कारण कई पुरातत्ववेत्ताओं ने अलग-अलग दिये हैं। कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार हमारे पूर्वज अपने जीवन का प्रलेखन करके अपनी जानकारी आनेवाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करना चाहते थे। परंतु ज्यादातर का यह मानना है कि हमारे पूर्वज इन चित्रों के जरिए एक दूसरे से संवाद स्थापित करते थे।
अजंता और भीमबेटका की चित्रकला में अंतर
अजंता गुफाओं के भित्तिचित्र और भीमबेटका शैलाश्रय के शैलचित्र में मूलभूत अंतर है उनके विषयों का। अजंता के भित्तिचित्रोंके विषय धार्मिक है और बुद्ध धर्म से जुड़े हुए हैं। भीमबेटका के शैलचित्रों के विषय प्राचीन मानव के दैनंदिन जीवन से जुड़े हुए हैं। इन शैलचित्रों में सामूहिक नृत्य, शिकार, युद्ध, रेखांकित मानवाकृतियाँ, पशुपक्षी आदि का चित्रांकन है।
अजंता में पत्थरोंपर प्लास्टर करके उसमें चित्र उकेरे गये हैं। भीमबेटका में सीधे चट्टानों पर हि चित्र बनायें गए हैं।
अजंता गुफाओं के भित्तिचित्र वाकाटक राजा हरिसेना के संरक्षण में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा धर्म प्रसार के उद्देश्य से बनायें गये। भीमबेटका शैलाश्रय के शैलचित्र आदि मानव की उत्स्फूर्त कला का अविष्कार है।
शैलचित्र बनाने का तरीका
भीमबेटका शैलाश्रय के शैलचित्रों की विशेषता यह है कि इनके रंग इतने वर्षों बाद भी ज्यों के त्यों हैं। इन शैलचित्रों में मुख्यतः गेरूआ लाल और सफेद रंग का प्रयोग हुआ है। कुछ जगहों पर हरा और पीला रंग भी है। गेरू से लाल रंग और चूने से सफेद रंग बनाया गया। रंगों के पावडर को तेल में घोलकर चित्रकारी की गई। पशुओं की चरबी तथा बीजों और पेड़ों से प्राप्त तेल का उपयोग किया गया। इसी कारण से इतने वर्षों बाद भी इन शैलचित्रों के रंग जैसे के वैसे टिके हुए हैं। चित्र बनाने के लिए ब्रश के स्थान पर साहि के काँटे, पेड़ की टहनिया तथा उंगलियों का प्रयोग किया गया है।
इन शैलचित्रों में आदि मानव के दैनंदिन जीवन की घटनाओं का चित्रण है जैसे नाचना, शिकार करना, शहद इकट्ठा करना इत्यादि। उस समय मनुष्य को कृषि का ज्ञान नहीं था ऐसा इन चित्रों से लगता है। साथ ही जिन जानवरों से मानव को खतरा था, जैसे बाघ, सिंह, घड़ियल, भालू इत्यादि, ऐसे जानवरों का चित्रांकन भी भीमबेटका के शैलचित्रों में दिखता है।
भीमबेटका शैलाश्रय में शैलचित्रों के साथ साथ स्थापत्य कला के कई अवशेष भी मिले हैं जैसे प्राचीन कीले की दिवार, लघुस्तूप, पत्थरों से बनायें हुये घर, शंख अभिलेख, शुंग और गुप्त कालिन अभिलेख और परमार कालिन मंदिर के अवशेष इत्यादि।
भीमबेटका शैलाश्रय को 2003 में युनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साईटस् में शामिल किया गया है। यह बात भीमबेटका की प्रसिद्धि और लोकप्रियताको बढाने में अवश्य ही सहायक सिद्ध होगी।
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इन शैलचित्रों से में पूरी तरह अनजान थी,विस्तार से जानकर बहुत अच्छा लगा ।कितना कुछ है जो हम जानते ही नही-आपको बहुत धन्यवाद सच ।
जवाब देंहटाएंExcellent. Nice information.
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